जिनेह वे पंसन्द नहीं करते l अपनी जीविका छिन जाने के डर से लोग उबाऊ नोकरियो से चिपके हुए है l
सांसारिक स्तर पर यह ग्रन्थ हमें बताता है कि हम कौन है तथा जीवन के सुख और सफलता की प्राप्ति के लिए हम आगे कैसे बढ़े I यह हमें कठिन परिश्रम की भी प्रेणना देता है और बताता है कि हमे परिश्रम पर दृढ विशवास होना चाहिए I आध्यात्मिक स्तर पर यही हमें अपने ही आत्मा का दिग्दर्शन कराता है और बताता है कि हमारा परमात्मा से क्या सम्बन्ध है I हिमालय की गुफाओ में छिपे सन्तो की कहानियों के माध्यम से यह ग्रन्थ हमें इस बात का ज्ञान कराता है कि हम अपने ह्रदय की गुफा में कैसे प्रवेश कर सकते है
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यह विधा इसी का निरूपण करती है l उनके चरणों में मेरा शतत नमन है और उनकी वस्तु उन्ही को समर्पित है l
Vridha Yavana Jataka (2 Volume set) [Hindi] Readworthy Publications जिनेह वे पंसन्द नहीं करतेVridha Yavana Jataka by SC Mishra , 1800 , , 4500 , , , , , , , , , , , l , l . l ., I . I . I l . l . , l . , l . , l . , , , l . , I